राजधानी की जाम की समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना के डिजाइन का लोनिवि की ओर से सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने न केवल परियोजना के स्वरूप की जानकारी दी, बल्कि इससे शहर को मिलने वाले लाभ और आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा की।
शनिवार शाम चंदर रोड स्थित कार्यशाला में मुंबई की स्पेक्ट्रम कंसल्टेंसी द्वारा तैयार किए गए डिजाइन को पेश किया गया। इसमें बताया गया कि एलिवेटेड रोड पर छह इंटरचेंज बनाए जाएंगे, जो विभिन्न इलाकों को जोड़ते हुए यातायात को सुगम बनाएंगे।
प्रमुख बिंदु:
• रिस्पना एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई 11 किमी होगी, जो विधानसभा स्थित रिस्पना पुल से शुरू होकर नागल पुल तक जाएगा।
• बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई 15 किमी होगी, जिसकी शुरुआत कारगी चौक से होगी और समापन साईं मंदिर (राजपुर रोड) के पास होगा।
• दोनों कॉरिडोरों की कुल लागत लगभग 2500 करोड़ रुपये आंकी गई है।
• परियोजना में आने वाले करीब 2000 निर्माणों और 103 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।
इंटरचेंज और कनेक्टिविटी:
• सहस्रधारा चौक, आईटी पार्क रोड-धोरण, बिंदाल तिराहा, मसूरी डायवर्जन जैसे इलाकों में इंटरचेंज बनाए जाएंगे।
• वाहनों के लिए कॉरिडोर की गति सीमा 60 किमी/घंटा तय की गई है, जिससे यातायात का दबाव कम होगा।
भूमि अधिग्रहण और डीपीआर:
• डीएम सविन बंसल ने स्थलीय निरीक्षण के लिए संबंधित विभागों की टीमें गठित कर दी हैं।
• परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी पूरी हो चुकी है, डीपीआर का ड्राफ्ट तैयार है और इसे 9 माह में अंतिम रूप देने की योजना है।
• आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार हाइड्रोलाजिकल स्टडी भी लोनिवि को सौंप दी गई है।
सामाजिक और तकनीकी पहलू:
• आर्किटेक्ट्स और विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि विस्थापित होने वाले लोगों के लिए सरकार पुनर्वास नीति स्पष्ट करे।
• बिजली, सीवर लाइन जैसी सेवाओं के पुनर्स्थापन पर भी मंथन किया गया।
• आर्किटेक्ट्स ने कॉरिडोर को मसूरी तक विस्तारित करने का सुझाव दिया, जिसे अगले चरण में शामिल किया जा सकता है।
भविष्य की योजना:
लोनिवि अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना देहरादून को स्मार्ट सिटी के तहत विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह यातायात के साथ-साथ शहरी स्वरूप में भी बड़ा परिवर्तन लाएगी।