आवास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने पीसी दुमका, विभागीय संयुक्त मुख्य प्रशासक के साथ बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना लागू करने के लिए नई आवास नीति में किए गए विशेष प्रावधानों की जानकारी दी। इस योजना का उद्देश्य अब हिमालयी क्षेत्र में भी आवास सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को सस्ती और सुरक्षित आवास उपलब्ध हो सके।
आवास नीति में नए बदलावों की घोषणा
आवास मंत्री ने बताया कि 2017 में पहली बार आवास नीति लागू की गई थी, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में इसका क्रियान्वयन संभव नहीं हो सका। अब, नई आवास नीति 2025 में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए खास बदलाव किए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में लाभार्थी अनुदान को 1.50 लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में बाखली शैली में बनाए गए आवासों के लिए तीन लाख रुपये का अनुदान मिलेगा।
बाखली शैली में बनाए जाएंगे घर, मिलेगा अतिरिक्त अनुदान
मंत्री ने स्पष्ट किया कि बाखली शैली में बने घरों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। यह शैली पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक निर्माण की विधि है, जो कठिन मार्गों और खड़ी ढलानों पर भी उपयोगी साबित होती है। आवास विभाग इस शैली को प्रोत्साहित करने के लिए तीन लाख रुपये का अनुदान दे रहा है।
उन्होंने बताया कि कम से कम दो मीटर का पहुंच मार्ग रखने वाले स्थानों पर भी बाखली शैली में घर बनाए जा सकेंगे। यह कदम क्षेत्रीय निर्माण की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
दुर्बल आय वर्ग को मिलेगा विशेष लाभ
मंत्री ने यह भी कहा कि आवास विभाग ने दुर्बल आय वर्ग के लिए आय सीमा को तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है, ताकि और अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 2.25 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान भी मिलेगा।