शिक्षा विभाग में 43 अधिकारियों को मिली पदोन्नति, राज्यभर के कार्यालयों में तैनाती

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत 43 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (Chief Administrative Officer) के पद पर पदोन्नत किया गया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद इन अधिकारियों की राज्य के विभिन्न जिलों और ब्लॉकों में तैनाती की गई है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि यह पदोन्नति विभागीय चयन समिति की सिफारिश के आधार पर की गई है। नियुक्तियों की प्रक्रिया स्थानांतरण अधिनियम एवं शासनादेश के अनुरूप पूर्ण की गई है। निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पदोन्नति अस्थायी है, जिसे विभागीय आवश्यकता या परिस्थितियों के आधार पर बिना पूर्व सूचना के रद्द किया जा सकता है।

कार्यभार न ग्रहण करने पर पदोन्नति मानी जाएगी निरस्त
शासनादेश के अनुसार यदि कोई अधिकारी निर्धारित समयावधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तो उसकी पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। साथ ही, पदोन्नति अस्वीकार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमावली के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

पदोन्नत अधिकारियों की सूची में शामिल प्रमुख नाम
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में प्रमुख नाम शामिल हैं:
• सुनील कुमार
• राकेश मोहन सकलानी
• प्रमोद काण्डपाल
• हरीश चंद्र रमोला
• पुष्पा उप्रेती
• महादेव मैठाणी
• ज्योति कुमार पांडे
• इंद्रा डिमरी
• गणेश सिंह गड़िया
• जगदंबा शाह
• सुनीता उनियाल
इनके साथ कुल 43 अधिकारियों को यह पदोन्नति प्रदान की गई है।

राज्यभर में की गई तैनातियाँ
पदोन्नत अधिकारियों को उत्तराखंड के विभिन्न शैक्षिक प्रशासनिक कार्यालयों में तैनात किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
• देहरादून: डोईवाला, कालसी, रायपुर
• हरिद्वार: नारसन
• चमोली: कर्णप्रयाग, नंदानगर, पोखरी, ज्योर्तिमठ
• पौड़ी गढ़वाल: बीरोंखाल, कोट
• टिहरी: देवप्रयाग
• रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि, उखीमठ
• अल्मोड़ा: भैसियाछाना, हवालबाग, ताड़ीखेत, द्वाराहाट, धौलादेवी, चौखुटिया
• ऊधमसिंह नगर: खटीमा
• नैनीताल: बेतालघाट, ओखलकांडा, कोटाबाग, भीमताल, हल्द्वानी, रामनगर
• पिथौरागढ़: विण, धारचूला, बेरीनाग, मुनस्यारी

इस पदोन्नति प्रक्रिया से न केवल अधिकारियों के करियर को नई दिशा मिलेगी, बल्कि राज्य के शिक्षा तंत्र में प्रशासनिक दक्षता और संचालन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। शासन स्तर पर की जा रही इस त्वरित कार्रवाई को विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और समयबद्धता का संकेत माना जा रहा है।

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