देहरादून: राजकीय दून अस्पताल में शनिवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब कैंसर रोग विभाग की ओपीडी में दो चिकित्सकों के बीच कथित तौर पर मारपीट की घटना सामने आई। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शशांक जोशी ने विभागाध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह पर ओपीडी में घुसकर मरीजों के सामने मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है।
डॉ. शशांक जोशी के अनुसार, वे ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे, तभी विभागाध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह वहां पहुंचे और अचानक उनका गिरेबान पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए थप्पड़ मारने लगे। इस दौरान ओपीडी में कई मरीज और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। सार्वजनिक रूप से हुई इस घटना से वे मानसिक रूप से आहत हुए और उन्हें मानसिक रोग विभाग की ओपीडी से उपचार भी लेना पड़ा। घटना के बाद उन्होंने इस्तीफा देने की पेशकश की है।
पीड़ित डॉक्टर का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने कुछ माह पूर्व भी विभागाध्यक्ष पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि कार्यभार संभालने के बाद से ही वे लगातार मानसिक दबाव में हैं, जिससे मरीजों का उपचार करना कठिन होता जा रहा है।
वहीं विभागाध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारते हुए कहा कि शुक्रवार को तकनीशियन के माध्यम से अवकाश का प्रार्थनापत्र डॉ. शशांक जोशी के पास भेजा गया था, लेकिन उन्होंने बिना हस्ताक्षर किए ओपीडी छोड़ दी। अगले दिन भी जब हस्ताक्षर नहीं किए गए, तो वे स्वयं कारण जानने ओपीडी में गए, इसी दौरान विवाद बढ़ गया।
मामले को लेकर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि दोनों चिकित्सकों के पक्ष सुने गए हैं। पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दोनों चिकित्सकों की इकाइयों में बदलाव कर दिया गया है।