
कुर्सी में है सबकी जान
कुर्सी में है सबकी जान,इसको पाकर बनते सब महान।
कुर्सी पाने के चक्कर में,लगाते है आरोप प्रत्यारोप।।
और फिर बढ़ाते है सबसे अपनी जान पहचान।
खेल ये कब तक खेला जाएगा,इसका तो पता नही।।
पर अब तो कुर्सी से ही है, मेरा भारत महान…।।।
🔴 अंजलिरुहेला
अंबेहटा पीर(सहारनपुर)