ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग ने प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिए एक सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी है। यह रिपोर्ट प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती हालत को उजागर करती है, खासतौर पर प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट और शिक्षकों की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 1149 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। चंपावत और रुद्रप्रयाग जिलों के स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की संख्या सबसे कम पाई गई है। इस 204 पेज की रिपोर्ट में पर्वतीय विद्यालयों में बच्चों और शिक्षकों के बीच बढ़ते अंतर का विवरण भी दिया गया है।
रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि प्रदेश में 12,065 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत स्कूलों में प्रधानाध्यापक की तैनाती नहीं है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की घटती संख्या का मुख्य कारण शिक्षकों की कमी है।
रिपोर्ट के अनुसार, 263 विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं है। इनमें 1 से 5 और 6 से 8 कक्षाएं सबसे अधिक प्रभावित हैं। 180 विद्यालयों में, 242 शिक्षक एक-एक छात्र को पढ़ा रहे हैं, और ये स्कूल अधिकतर पौड़ी, अल्मोड़ा, और टिहरी जिलों में स्थित हैं।
इसके अलावा, 3504 विद्यालयों में एकल अध्यापक की तैनाती की गई है, जिनमें पिथौरागढ़, पौड़ी, और चमोली जिले में ऐसे स्कूलों की संख्या सबसे अधिक है।
आयोग के सुझाव
पलायन आयोग ने सरकार को कई सुधारात्मक सुझाव भी दिए हैं। आयोग ने सुझाव दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय अतिरिक्त छूट दी जाए। साथ ही, शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानांतरण नीति बनाई जाए। आयोग ने यह भी कहा कि शिक्षकों को विद्यालय से 8 से 10 किमी. दूर रहने की अनिवार्यता को खत्म किया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन के तौर पर 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाएं दी जाएं।
आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि नए शिक्षकों को प्रशिक्षण की अनिवार्यता हो, शिक्षकों को विद्यालय के समीप आवास की सुविधा प्रदान की जाए, गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए, और स्कूलों में प्रयोगशाला, शौचालय, खेल मैदान और चारदीवारी जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
आयोग का बयान
पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने कहा, “हमने सरकार को प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की सर्वे रिपोर्ट सौंप दी है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालयों में तत्काल सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि 1 से 5 कक्षा तक बच्चों की संख्या में निरंतर कमी हो रही है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।”