उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर थाना कुमाऊं टीम ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आगरा (उत्तर प्रदेश) से डिजिटल अरेस्ट के मास्टरमाइंड अमन कुशवाहा को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को आरबीआई और सीबीआई का अधिकारी बताकर एक नागरिक को मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी और 47 लाख रुपये की ठगी की।
व्हाट्सएप और स्काइप से बनाया वीडियो बंधक
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने पीड़ित को लगातार व्हाट्सएप और स्काइप कॉल्स के माध्यम से 18 दिनों तक वीडियो और ऑडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा। उसे किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया और लगातार धमकाया गया कि उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेन-देन के तहत कार्रवाई की जाएगी। भयभीत होकर पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में 47 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
फर्जी दस्तावेज और सरकारी एजेंसियों के नाम पर नोटिस
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पीड़ित को डराने के लिए फर्जी नोटिस भेजे, जिन पर आरबीआई, सीबीआई, ईडी जैसे एजेंसियों के नकली लोगो और लेटरहेड थे। यही नहीं, आरोपी ने फर्जी सिम कार्ड और आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए अपने नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर अपराध को अंजाम दिया।
एसटीएफ की छापेमारी और जब्ती
एसटीएफ कुमाऊं साइबर थाना की टीम ने विशेष ऑपरेशन चलाकर अमन कुशवाहा को आगरा से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। टीम ने यह भी पता लगाया है कि आरोपी के बैंक खातों में हाल ही में लाखों रुपये का लेन-देन हुआ है।
अन्य राज्यों से कनेक्शन और नेटवर्क की जांच
उत्तराखंड एसटीएफ ने अब इस मामले में देश के अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क साधा है, ताकि आरोपी के अंतरराज्यीय नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी मिल सके। एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट जैसी नई तकनीकों का उपयोग करके आम लोगों को फंसाता है और लाखों रुपये की ठगी करता है।
एसटीएफ का अलर्ट
उत्तराखंड एसटीएफ ने नागरिकों से अपील की है कि वे कोई भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन नोटिस मिलने पर तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसे ट्रांसफर की मांग नहीं की जाती।