उत्तराखंड में उपभोक्ता खर्च में कमी, अन्य राज्यों के मुकाबले कम खर्चीले पाए गए लोग

उत्तराखंड के लोग उपभोक्ता खर्च के मामले में अन्य राज्यों के मुकाबले कम खर्चीले पाए गए हैं। खासकर खानपान और सैर-सपाटे पर खर्च करने के मामले में उत्तराखंड के लोग मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से पीछे हैं। इस संबंध में आंकड़े हाल ही में विधानसभा में प्रस्तुत किए गए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आए हैं, जिसमें राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के औसत उपभोक्ता खर्च (एमपीसीई) का तुलनात्मक विवरण दिया गया है।

*ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खर्च का अंतर*

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता औसतन 5003 रुपये प्रति माह खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह खर्च 7486 रुपये प्रति माह है। यह आंकड़ा देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम है, जहां लोग खाद्य व गैर-खाद्य वस्तुओं पर अधिक खर्च करते हैं।

*राष्ट्रीय औसत से ऊपर उत्तराखंड का खर्च*

यहां उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड का मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोक्ता खर्च (एमपीसीई) राष्ट्रीय औसत से अधिक है। 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, देश के ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 4122 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 6996 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च हो रहे हैं। वहीं, उत्तराखंड का खर्च इन आंकड़ों से अधिक है, जो यह दर्शाता है कि राज्य के लोग थोड़ा ज्यादा खर्च करते हैं, लेकिन फिर भी यह खर्च अन्य राज्यों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम है।

*उत्तर-पूर्वी राज्यों का अधिक खर्च*

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उत्तर-पूर्वी राज्य खानपान, सैर-सपाटे और अन्य सेवाओं पर अधिक खर्च कर रहे हैं। इन राज्यों के लोग उत्तराखंड के मुकाबले इन गतिविधियों पर ज्यादा धन खर्च करते हैं।

*सिक्किम का एमपीसीई सबसे अधिक*

सिक्किम देश का वह राज्य है जहां सबसे अधिक एमपीसीई है। सिक्किम में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति औसतन 9377 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 13978 रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद चंडीगढ़, गोवा, अंडमान और निकोबार और पुडुचेरी आते हैं।

*उत्तराखंड के पड़ोसी राज्यों का खर्च*

उत्तराखंड के पड़ोसी राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ और झारखंड में उपभोक्ता खर्च काफी कम है। इन राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 3000 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 5000 रुपये से भी कम खर्च किए जाते हैं।

*18 राज्यों ने उत्तराखंड से अधिक खर्च किया*

आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड से अधिक खर्च करने वाले 18 राज्य हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, अंडमान और निकोबार, चंडीगढ़, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं।

*एमपीसीई का सूचकांक:*

*सबसे अधिक एमपीसीई वाले राज्य:*

| राज्य | ग्रामीण खर्च (रु.) | शहरी खर्च (रु.) |
| ————– | —————— | ————— |
| सिक्किम | 9377 | 13978 |
| चंडीगढ़ | 8857 | 13425 |
| गोवा | 8048 | 9726 |
| अंडमान निकोबार | 7771 | 10453 |
| पुडुचेरी | 7598 | 8637 |

*सबसे कम एमपीसीई वाले राज्य:*

| राज्य | ग्रामीण खर्च (रु.) | शहरी खर्च (रु.) |
| ———— | —————— | ————— |
| छत्तीसगढ़ | 2739 | 4927 |
| झारखंड | 2946 | 5393 |
| बिहार | 3670 | 5080 |
| ओडिशा | 3481 | 5395 |
| उत्तर प्रदेश | 5003 | 7486 |

आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड में उपभोक्ता खर्च के मामले में लोग अन्य राज्यों के मुकाबले कम खर्चीले हैं, विशेष रूप से खानपान और सैर-सपाटे पर। हालांकि, राज्य का खर्च राष्ट्रीय औसत से ऊपर है, लेकिन उत्तर-पूर्वी राज्यों के मुकाबले यह काफी कम है।

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