उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नीदरलैंड का किया दौरा

उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत प्रदेश के सहकारिता क्षेत्र को सशक्त और विकसित करने के उद्देश्य से नीदरलैंड के दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान, वे डेयरी विकास, ग्रामीण वाणिज्यिक विकास, फ्लोरीकल्चर, खाद्य और कृषि क्षेत्र की आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही, वे नीदरलैंड के सबसे बड़े वित्तीय सेवा संस्थाओं में से एक राबोबैंक समूह की सहकारी सिद्धांतों पर आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन करेंगे।

नीदरलैंड में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला
डॉ. धन सिंह रावत ने अपने बयान में बताया कि इस दौरे के दौरान वे सहकारिता सचिव दिलीप जावलकर और प्रबंध निदेशक राज्य सहकारी बैंक नीरज बेलवाल के साथ नीदरलैंड में हैं। यह दौरा नाबार्ड द्वारा प्रवर्तित बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान के सहयोग से आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरे के तहत राबोबैंक समूह द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के विभिन्न सहकारिता विभागों के 26 से अधिक अधिकारी और हिमाचल प्रदेश के उद्यान और सहकारी मंत्री जगत सिंह नेगी भी शामिल हैं।

मुख्य विषयों पर कार्यशाला और भ्रमण
डॉ. रावत ने बताया कि इस कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा कोऑपरेटिव गवर्नेंस, वैल्यू चेन फाइनेंस, ग्रामीण वाणिज्यिक विकास, हॉल्टीकल्चर, फ्लोरीकल्चर, डेयरी विकास, और खाद्य एवं कृषि अनुसंधान जैसे प्रमुख विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिया जाएगा। इसके अलावा, नीदरलैंड के विभिन्न शहरों में स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भी भ्रमण किया जाएगा।

राबोबैंक समूह की भूमिका
राबोबैंक नीदरलैंड के सबसे बड़े वित्तीय सेवा संस्थाओं में से एक है, जो सहकारी सिद्धांतों के तहत कार्य करता है और कृषि वित्तपोषण में अग्रणी है। यह बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य और कृषि क्षेत्र के वित्तीयपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डॉ. रावत ने कहा कि राबोबैंक की वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाकर उत्तराखंड के सहकारी बैंकों की वित्तीय प्रणाली को और मजबूत तथा प्रभावी बनाया जाएगा।

उत्तराखंड के लिए विशेष लाभ
डॉ. रावत ने कहा कि नीदरलैंड की भौगोलिक स्थिति उत्तराखंड से मिलती-जुलती है। इस कारण यहां की आधुनिक कृषि प्रणाली, खाद्य प्रसंस्करण, फ्लोरीकल्चर, हॉल्टीकल्चर, कोऑपरेटिव गवर्नेंस, ग्रामीण वाणिज्यिक विकास और डेयरी विकास के मॉडल का गहन अध्ययन कर इसे उत्तराखंड में लागू किया जाएगा। इससे प्रदेश के काश्तकारों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को अधिक से अधिक लाभ मिल सकेगा।

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