ऋषिकेश – प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और कथावाचक जया किशोरी आज ऋषिकेश पहुंचीं, जहां उन्होंने परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती से भेंट की। स्वामी चिदानंद ने उन्हें हिमालय की हरित भेंट स्वरूप रुद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद जया किशोरी ने पावन गंगा तट पर आरती में भाग लिया और कुछ समय मां गंगा के समीप ध्यान और साधना में बिताया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस अवसर पर कहा, “मां गंगा केवल जलधारा नहीं, एक दिव्य ऊर्जा हैं। उनका स्पर्श केवल शरीर को नहीं, आत्मा को भी पवित्र करता है। जो व्यक्ति गंगा से जुड़ता है, वह अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग अपनाता है।”
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा, “मां गंगा के तट पर आना किसी भी साधक के लिए सौभाग्य की बात होती है। यहां कुछ पल बिताना भी तन, मन और आत्मा के लिए शुद्धि का माध्यम बनता है।”
जया किशोरी ने गंगा स्नान और पूजन का महत्व बताते हुए कहा, “गंगा की हर एक डुबकी में जीवन का सार समाया है। मां गंगा का पूजन और स्नान हर व्यक्ति को नियमित रूप से करना चाहिए, यह केवल परंपरा नहीं बल्कि आत्मिक जागृति का साधन है।”
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में रखे विचार
इससे पहले जया किशोरी ने अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के चौथे दिन साधकों को संबोधित किया था। उन्होंने गुरु-शिष्य संबंधों पर विचार रखते हुए कहा, “गुरु का कार्य व्यक्ति को भगवान से जोड़ना होता है, न कि स्वयं को भगवान समझना। आज कुछ गुरु स्वयं को ईश्वर से भी ऊपर मानने लगे हैं, जो धर्म और आध्यात्म के लिए खतरनाक संकेत है।”
जया किशोरी की इस आध्यात्मिक यात्रा ने ऋषिकेश में मौजूद श्रद्धालुओं और साधकों को गहराई से प्रभावित किया। गंगा तट पर उनकी उपस्थिति और विचारों ने महोत्सव को और भी आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।