उत्तरकाशी में पिछले एक सप्ताह से समय-समय पर आ रहे छोटे-छोटे भूकंप लोगों में दहशत भी फैला रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये छोटे झटके किसी बड़े भूकंप की संभावित चेतावनी भी हो सकते हैं। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में लंबे समय से कोई बड़ा भूकंप तो नहीं आया है, जिससे पृथ्वी के भीतर ऊर्जा का संचय भी हो रहा है।
आईआईटी रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र सिंह बताते हैं कि जब भूकंप की तीव्रता में एक अंक की वृद्धि होती है तो धरती से निकलने वाली ऊर्जा 30 गुना तक बढ़ भी जाती है, और अगर तीव्रता में दो अंकों की वृद्धि हो तो यह वृद्धि 900 गुना तक भी हो जाती है। इसका मतलब यह है कि तीव्रता में मामूली बढ़ोतरी भी भारी तबाही ला सकती है।
डॉ. सिंह के अनुसार, यह कहना मुश्किल है कि छोटे भूकंप किसी बड़े भूकंप को रोक सकते हैं। दरअसल, इन छोटे झटकों से वह ऊर्जा बाहर भी नहीं निकलती, जो बड़े भूकंप को जन्म भी देती है। उन्होंने यह भी चेताया कि जब भूकंप की तीव्रता 6 या उससे अधिक हो जाती है, तो यह विनाशकारी रूप भी ले सकता है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में वर्ष 1991 में उत्तरकाशी में 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके बाद से अब तक कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। वर्ष 2007 में खरसाली में 5.0 तीव्रता का भूकंप जरूर दर्ज किया गया, लेकिन विशेषज्ञ इसे ‘सेस्मिक गैप’ यानी भूकंपीय शून्य के रूप में ही देख रहे हैं, जो भविष्य में एक बड़े भूकंप की आशंका को बल भी देता है।
“धरती के भीतर की गतिविधियां चिंता का विषय हैं”
देहरादून स्थित वाडिया इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार का मानना है कि भले ही छोटे भूकंप सीधे तौर पर बड़े भूकंप से जुड़े न हों, लेकिन लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियां चिंता का विषय भी जरूर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, जो कि सिस्मिक जोन-5 में आता है, वहाँ लंबे समय से बड़ा भूकंप न आना खतरे की घंटी भी हो सकता है। ऐसे में आपदा प्रबंधन की तैयारी और सतर्कता बेहद ही जरूरी है।