मेरी बात

मणिपुर में हिन्दुस्तान का सिर झुक गया 

नरेशरोहिला

मणिपुर:  दो माह से भी अधिक समय से जातीय हिंसा से प्रभावित पूर्वोत्तर के मणिपुर से हाल ही में जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वह बेहद ही शर्मनाक हैं और इससे हिन्दुस्तान का सिर मणिपुर में झुक गया है। कहा जा रहा है कि 4 मई को हिंसा के दौरान वहां कुकी समुदाय की दो महिलाओं को नंगा करके घुमाया गया। वायरल वीडियो इसी घटना के हैं। मणिपुर में दो माह से भी अधिक समय से हिंसा हो रही है और पूरा राज्य एक तरह से हिंसा की आग में झुलस रहा है और लगातार अशांत बना हुआ है।

मणिपुर वीडियो के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर स्वत संज्ञान लिया और चीफ जस्टिस चन्द्रचूड ने स्पष्ट कहा कि सरकार इस पर एक्शन ले नहीं सुप्रीम कोर्ट खुद एक्शन लेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के बार सरकार द्वारा कीगयी कार्रवाई की रपट भी तलब की।

इसी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मणिपुर हिंसा पर अपनी चुप्पी तोडी और कहा कि मणिपुर में इस तरह के घिनौने कृत्य के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधान मंत्री ने यह कहा कि उन्हें इस घटना से बेहद दु:ख पहुंचा लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके घंटो बाद भी मणिपुर की सरकार बनी हुई है या फिर उसे बनाए रखा जा रहा है। यह तब है जब मणिपुर के मुख्यमंत्री एन वीरेंद्र यह तक बयान देकर खुद ही फंसते दिखे कि ऐसी तो यहां सैंकड़ों घटनाएं हो चुकी है। ऐसा लगता है कि इस बयान का वे खुद ही अर्थ नहीं समझ पाए। जाहिर है जब मुख्यमंत्री यह कहते दिखे कि ऐसी सैंकडों घटनाएं हुई हैं तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि इसके बाद सरकार ने क्या कदम उठाए और क्या सरकार ऐसी घटनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय या गृहमंत्री अमित शाह को दी।

ध्यान हो हिंसा के बाद गृहमंत्री अमित शाह खुद मणिपुर  गए थे। उन्होंने हिंसा प्रभावित कई इलाकों का दौरा भी किया और विभिन्न वर्गों के लोगों, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की थी। जाहिर है तब मणिपुर के मुख्यमंत्री की बातचीत भी गृहमंत्री से हुई होगी तो क्या उन्होेंने ऐसी घटनाओं की जानकारी अमित शाह को दी थी। वास्तव में इस तरह के सवाल उठने अब जायज है क्यों हिंसा की घटनाओं को दो माह से अधिक समय बीत गया लेकिन हिंसक वारदातें नहीं रूक रही।

वास्तव में ऐसा लगता है कि गृहमंत्री के दौरे के बाद मणिपुर की सरकार भी मुतमईन हो गयी कि समस्या खत्म हो गयी और इसी वजह से बराबर खामोशी बनी रही लेकिन जब महिलाओं की नग्न परेड की वीडियो सामने आयी और सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी तो वहां की सरकार के होश फाखता हो गए।

अब प्रधानमंत्री ने मणिपुर में महिलाओं के इस तरह के अपमान पर कडा संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने राज्यों को कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के कदम उठाने को भी कहा लेकिन सवाल यह है कि क्या निंदा करने और कानून व्यवस्था का रोना रोकर इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। जनता तो सरकारों को चुनकर ही इसलिए लाती है कि वह हर हाल में उनकी जानमाल की रक्षा और सुरक्षा करे तो फिर ऐसी किसी भी घटना के बाद कानून व्यवस्था का रोना और क्यों नहीं हर वक्त कानून व्यवस्था को चाक चौबंद रखा जाता। सुप्रीम कोर्ट हरकत में आ गया तो सभी के कान खडे हो गए अन्यथा कोई कुछ न बोलता। हर मामले में सरकारों को यदि न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद ही कुछ करते दिखना है तो फिर चुनाव और सरकारों की आवश्यकता ही क्या है। सब कुछ न्यायपालिका को ही सौंप देना चाहिए, वह ही देखे।

अब हो यह भी सकता है कि जल्द ही मणिपुर के मुख्यमंत्री अपने बयान से पलटी मार दे और कहने लगे कि जुबान फिसल गयी या मीडिया ने तोड मरोड कर पेश किया लेकिन एक बात साफ हो गयी कि मणिपुर में ऐसी हैवानियत जरूर हुई।

जो भी हो इस तरह की घटनाएं किसी देश और समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती। वैसे अब भी अगर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो इस बात के लिए आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता कि आगे ऐसी घटनाएं नहीं होगी। यह वास्तव में बेहद बडी समस्या है कि जब इस तरह के दंगे या जातिय हिंसा होती है तो दबंग किस्म के लोग या समूह सबसे पहले महिलाओं या अपनी विरोधी खास कम्युनिटी की महिलाओं पर ही जोर आजमाइश करते है। इसलिए बहुत संभव है कि भविष्य में भी इस तरह की शर्मनाक और हिन्दुस्तान का सार झुकाने वाली घटनाएं होती रहे । इसलिए कि भी सरकार, राजनीतिक दल और दूसरे लोग निंदा,आलोचना कर चुप हो जाते है लेकिन अब सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा। सरकारों को सचमुच ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों पर कडा शिंकजा कसना होगा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कडा संदेश दिया है तो अब उस पर अमल होना चाहिए। अच्छा हो कि सबसे पहले केंद्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री मणिपुर सरकार पर एक्शन ले। यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि किसी भी क्षेत्र में शांति का माहौल बनाए रखना सरकार की ही जिम्मेदारी होती है और जो सरकार जघन्य और देश को शर्मसार करने वाली हिंसक घटनाओं पर भी कुछ बोलते या करते न दिखे उसे तो खुद ही कुर्सी छोड देनी चाहिए। इसलिए प्रधानमंत्री ने जो दुख प्रकट किया, उसका असर तभी दिखेगा जब मणिपुर की नाकाम सरकार पर एक्शन होगा।

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