
देहरादून । वीमन और चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी ‘अस्तित्व’ की अध्यक्ष और एक अंग्रेज माध्यम के स्कूल में हिन्दी की शिक्षिका श्रीमती मंजू त्रिपाठी ने समाजसेवी संगठन मानिनी द्वारा बच्चे के नाम के दस्तावेजीकरण में पिता के नाम से पहले माता के नाम को अंकित किए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान का समर्थन किया है।
‘बच्चों के दस्तावेजीकरण में माता का नाम अंकित किए जाने जाने का अभियान’
आपको बता दें कि मानिनी फाउंडेशन महिला सशक्तिकरण और महिला श्रम अधिकारों पर ध्यान केन्द्रित करने का काम कर रहा है। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उसकी शाखाएं काम कर रही है।
हाल ही में मानिनी फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष डाॅ भारती चव्हाण ने इस बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और इस दिशा में सरकार के द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा कि वैदिक कहावत ‘मातृ देवो भव’ बच्चे के अस्तित्व का प्रतीक है। एक माँ अपने परिवार की निष्पक्ष, जिम्मेदार, पुरस्कृत और निस्वार्थ देखभाल के कारण सम्मान, पूजा, सम्मान और भक्ति की पात्र है। बच्चे के पालन-पोषण में उसे उचित स्थान देकर समाज को उसका सम्मान करना चाहिए। एक बच्चे को जन्म देने के बाद, महिलाओं का पुनर्जन्म होता है।बच्चे से गर्भनाल जुड़ी होने के बाद भी, बच्चे को मां के प्रति भक्ति, समर्पण और कृतज्ञता रखनी चाहिए। बच्चे के जन्म से ही मां के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। उसके नाम का दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए और बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र माता का नाम, पिता का नाम और उपनाम अंकित किया जाना चाहिए। विद्यालय/महाविद्यालय/संस्थान/नौकरी के आवेदन पत्र/अभिलेखों के लिए कोई अन्य प्रपत्र भरे जाने की स्थिति में माता के नाम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, उसके बाद पिता का नाम और उपनाम। प्रत्येक फॉर्म में चार कॉलम होने चाहिए; आवेदक का नाम, माता का नाम, पिता का नाम और उपनाम। इससे समाज में मां के लिए पहचान और पैमाना बनेगा और बच्चे को जीवन भर उसे उचित सम्मान देने की जिम्मेदारी होगी।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को इस बात के लिए बधाई दी कि एकल माताओं को जन्म प्रमाण पत्र में पिता का नाम लिए बिना अपना नाम लिखने की अनुमति दी गई है। वर्तमान में जन्म प्रमाण पत्र में माता का नाम एक अलग प्रविष्टि में अंकित है, लेकिन जब बच्चे का पूरा नाम लिखा जाता है तो माता का नाम नहीं आता है। हमारा प्रस्ताव है कि बच्चे का पूरा नाम बच्चे का नाम, माता का नाम, पिता का नाम और उपनाम के रूप में लिखा जाना चाहिए।
श्रीमती मंजू त्रिपाठी ने मानिनी के इस अभियान को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि निश्चित ही जब हर बच्चे के नाम साथ उसकी माता का नाम भी प्राथमिक रूप से दस्तावेजों में अंकित होगा तो नारी शक्ति एक नए रूप में उदय होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को इस बारे में कानून बनाकर उचित पहल करनी चाहिए।