प्रदेश में 12 दिनों के भीतर बिजली की मांग 3.8 करोड़ यूनिट से बढ़कर 4.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि उपलब्धता केवल 2.3 करोड़ यूनिट ही है। वहीं गैस आधारित प्लांट भी फिलहाल बंद पड़े हैं।
प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने और बाजार में आपूर्ति की कमी के कारण बिजली संकट गहराने लगा है। पिछले दो दिनों से यूपीसीएल ने ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ छोटे कस्बों और फर्नेस उद्योगों में भी कटौती शुरू कर दी है। बाजार में बिजली की कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट से कम नहीं मिल रही।
प्रदेश में एक मार्च को बिजली की मांग 3.8 करोड़ यूनिट थी, लेकिन बढ़ती गर्मी के साथ इसमें लगातार इजाफा हो रहा है। बृहस्पतिवार तक मांग बढ़कर 4.5 करोड़ यूनिट पहुंच गई। इसके मुकाबले यूजेवीएनएल से केवल 90 लाख यूनिट और केंद्रीय पूल से 1.3 करोड़ यूनिट बिजली मिल रही है। कुल उपलब्धता करीब 2.3 करोड़ यूनिट है, जबकि यूपीसीएल को लगभग 70 लाख यूनिट बिजली बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
बिजली की कमी के चलते पिछले दो दिनों से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 2 से 2.5 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। वहीं छोटे कस्बों में करीब 1 से 1.5 घंटे और स्टील फर्नेस उद्योगों में भी लगभग 2 घंटे की बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है। यूपीसीएल प्रबंधन का कहना है कि बाजार में बिजली की भारी कमी बनी हुई है। यहां तक कि इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ⚡
गैस की कमी से बिजली उत्पादन पर असर
इस्राइल–ईरान युद्ध के चलते गैस की कमी हो गई है, जिससे गैस आधारित पावर प्लांट भी प्रभावित हो रहे हैं। इसी वजह से काशीपुर में स्थित 214 मेगावाट क्षमता वाले श्रावंती (गामा कंपनी) के पावर प्लांट में बिजली उत्पादन बंद पड़ा है। उत्पादन शुरू करने के लिए इन संयंत्रों को बाजार से गैस खरीदनी होगी, लेकिन फिलहाल गैस या तो उपलब्ध नहीं है या फिर काफी महंगे दामों पर मिल रही है। यदि महंगी गैस से बिजली उत्पादन किया जाता है तो यूपीसीएल को यह बिजली 10 रुपये प्रति यूनिट से भी अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ेगी। यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार के अनुसार, बाजार से मांग के अनुरूप बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
नियामक आयोग ने 150 मेगावाट पीपीए पर लगाई रोक
यूपीसीएल ने 500 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) नियामक आयोग की मंजूरी के बाद किया था। हालांकि इसमें से 350 मेगावाट बिजली तकनीकी समस्याओं के कारण नहीं मिल पाई। वहीं 150 मेगावाट बिजली के पीपीए पर भी नियामक आयोग ने फिलहाल रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि इसके लिए दोबारा नियामक आयोग से अनुमति लेनी पड़ेगी।