कोलकाता में आयोजित विशेष कार्यक्रम में बोले उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री, राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय को किया नमन
राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर कोलकाता में विशेष स्मरणोत्सव कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस मौके पर उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजमुदार के साथ सल्ट लेक स्थित पीएम-श्री केन्द्रीय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग भी किया।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए डॉ. रावत ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ कोई सामान्य गीत नहीं, बल्कि यह राष्ट्र जागरण का महामंत्र भी है। उन्होंने कहा कि जिस पवित्र भूमि पर इस गीत की रचना हुई, उस धरती पर आकर स्वयं को धन्य ब्व्ही महसूस कर रहा हूं।
डॉ. रावत ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय को नमन करते हुए कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ भारतीय संस्कृति, अस्मिता व राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस गीत की रचना न केवल साहित्यिक बल्कि आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक भी थी।
मंत्री ने बताया कि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल यह गीत संन्यासी विद्रोह की प्रेरणा बना, और आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा में समा गया। इसी गीत की लौ से देश ने स्वतंत्रता का सवेरा भी देखा।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशवासियों के नाम भेजा गया संदेश लाइव प्रसारित भी किया गया। इसके बाद डॉ. रावत ने डॉ. सुकांत मजमुदार के साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से संवाद भी किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से उनके अध्ययन, आकांक्षाओं और विद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं के बारे में जानकारी ली और कहा कि बच्चों को सदैव ‘वन्दे मातरम्’ की भावना से ओतप्रोत रहकर देश सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए।