भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके जाने से खेल जगत को बड़ा झटका लगा है। आज उनका अंतिम संस्कार होगा।
निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए देहरादून स्थित आवास पर रखा जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी ले जाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित करने वाले जसपाल राणा के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। उनके पैतृक गांव टटोर, नैनबाग और चिलामू समेत आसपास के इलाकों में मातम पसरा हुआ है। निधन की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए देहरादून रवाना हो गए।
जसपाल राणा के करीबी मित्र प्रदीप कवि, मोहन सिंह रावत और डॉ. विरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उनका स्वभाव बेहद मिलनसार और सरल था। उन्होंने कहा कि करीब चार-पांच महीने पहले जसपाल कुछ दिनों के लिए अपने गांव आए थे, लेकिन उस दौरान उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।
उन्होंने बताया कि जसपाल राणा का जन्म उत्तरकाशी जिले में हुआ था। उस समय उनके पिता नारायण सिंह आईटीबीपी में सेवाएं दे रहे थे। शुरुआती शिक्षा उन्होंने मसूरी और दिल्ली में प्राप्त की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि निशानेबाजी की ओर बढ़ी और उन्होंने इस खेल का विधिवत प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
जसपाल राणा के निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और खेल जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुरारी लाल खंडवाल, शांति प्रसाद भट्ट, ब्लॉक प्रमुख सीता पंवार, कुंवर सिंह पंवार और सुनील थपलियाल समेत अनेक खेल प्रेमियों ने उनके निधन को खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया।